हिंदी शोध संसार

रविवार, 18 मार्च 2012

आपके कंप्यूटर के लिए सुंदर, आकर्षक और मुफ्त हिंदी फॉट

मैं अपने ब्लॉग के लिए सुंदर हिंदी फॉट की तलाश में था। तलाश पूरी हुई। और मैंने अपने ब्लॉग की फॉंट सैटिंग भी कर ली है। इसके बाद मेरा ब्लॉग सुंदर दिखने लगा है। आप भी अपने ब्लॉग को सुंदर, आकर्षक और मनोरम बना सकते हैं। मगर, ये ब्लॉग अपने सुंदर रूप में तभी दिखेगा जब आपके कंप्यूटर में ये फॉट इंस्टॉल हो।
आपके कंप्यूटर के लिए सुंदर, आकर्षक और मुफ्त हिंदी फॉट यहां से डॉऊनलोड किए जा सकते हैं।
1. सिद्धांत
2. अपराजिता और कोकिला फॉंट
3. लोहित

रविवार, 11 मार्च 2012

एक युक्ति जो बदल देगी आपके ब्लॉगिंग का नक्शा


अगर आप अपने ब्लॉग को खूबसूतरत, आकर्षक, मनोहारी, सुरम्य देखना चाहते हैं, तो हमारे पास एक ऐसी युक्ति है। जिसे आप अपने ब्लॉगिंग को खूबसूरत और बेहद खूबसूरत बना सकते हैं।
जैसा कि हमने अपने ब्लॉग के लिए किया है।
कंप्यूटर पर हिंदी लेखन में एकरसता की प्रमुख वजह फॉंट है। फॉट यानी वर्ण का शिल्प यानी डिजाइन। कुछ साल पहले तक कंप्यूटर हिंदी लिखना आसान काम नहीं था। फॉटों की विविधता के चलते, उसे दूसरे कंप्यूटर पर पढ़ना और भी दुरूह कार्य था, मगर यूनिकोड के आविष्कार से कंप्यूटर पर हिंदी लेखन और पठन-पाठन आसान हो गया। मगर, हिंदी ब्लॉगों और वेबसाइटों पर हिंदी का एक ही फॉट दिखता है वो है यूनिकोड मंगल या ताहोमा(ब्लॉगों में)। आप किसी भी ब्लॉग या साइट पर जाइये आपको टेढ़े-मेढ़े अक्षरों में हिंदी लिखी मिलेगी। कंप्यूटर पर हिंदी लेखन में शिल्प यानी डिजाइन का बेहद अभाव है। हिंदी अखबारों में आप सुंदर और मनोहारी फॉंट देख सकते हैं। सवाल उठता है कि ब्लॉगों और वेबसाइटों में इतने सुंदर फॉंट देखने को क्यों नहीं मिलते हैं।
दरअसल, हिंदी के अखबारों की शिल्पकारी यानी डिजाइनिंग बेहद महंगे सॉफ्टवेयरों यानी मृदुवसनों पर की जाती है, जो हिंदी वेबसाइटों और ब्लॉगों के लिए उपलब्ध नहीं होते हैं अगर होते भी है तो उनके फॉट यूनिकोडित नहीं होते हैं, अत: लिख भी दिए जाएं तो उन्हें पढ़ने में दिक्कतें आएंगी।
तो कंप्यूटर पर हिंदी को सुंदर कैसे देखें। यह समस्या हिंदी ब्लॉगिंग जगत में लगातार बरकरार है। मैं भी इस समस्या से जूझ रहा था। कोशिश थी कि हिंदी के टेढ़े-मेढ़े और बेढंगे फॉट- ताहोमा(ब्लॉग में प्रयुक्त) और यूनिकोड मंग(हिंदी वेबसाइटों में प्रयुक्त फॉंट) की दुनिया से बाहर निकला जाए। काफी कोशिशें कीं। कहा जाता है कि सच्चे मन से की गई कोशिशें कभी बेकार नहीं जातीं। यही वजह थी कि मेरी कोशिशें भी बेकार नहीं गई।
अन्वेषण के दौरान मुझे कई सुंदर, सुघड़, मनोहारी और आकर्षक यूनिकोडित फॉंट मिले। उदाहरण के तौर पर- सिद्धांता, कोकिला, अपराजिता, डीवीटीटी योगेश, संस्कृत-2003 के नाम गिनाए जा सकते हैं। इन फॉंटों को मैंने अपने कंप्यूटर पर इंस्टॉल कर लिया। इंस्टॉल करने के बावजूद मैं इन फॉटों में अपना ब्लॉग नहीं लिख पाता था। हां, ऑपन ऑफिस में लिखकर इसे अपने ब्लॉग पोस्ट में चिपका लेता था। मगर, इसके साथ भी समस्या थी। कभी-कभी ब्लॉग पर इस फॉट में लिखे गए शब्द चिपकते नहीं थे। वही पुराना ताहोमा फॉट दिखने लगता था।
एक बात और, चाहकर भी ब्लॉग पोस्ट का हेडर और डेट-हेडर का फॉंट नहीं बदल पाता था। ब्लॉग का हेडर, सब-हेडर, विगेट्स, टैब, फुटर के फॉट भी नहीं बदल पाता था।

अचानक दिमाग में एक युक्ति सूझी। मैंने अपने ब्लॉग के एचटीएमएल कोड में थोड़ी फेरबदल का फैसला किया।(साफ-साफ बता दूं कि मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है, साथ हीं मुझे सॉफ्टवेयर यानी मृदुवसन का भी कोई ग्यान नहीं है) इसके बावजूद मैंने इस दिशा में कोशिश करने का फैसला किया और अपने प्रयास में सफल रहा।
थोड़ी-सी फेरबदल ने मेरे ब्लॉग का नक्शा बदल दिया। मैं अपने ब्लॉग के ब्लॉग पोस्ट का हेडर और डेट-हेडर, ब्लॉग का हेडर, सब-हेडर, विगेट्स, टैब, फुटर के फॉटों को बदलने में कामयाब रहा।
अगर आप भी अपने ब्लॉग का नक्शा बदलना चाहते हैं तो तैयार हो जाइए-
  • सबसे पहले आपको अपने ब्लॉग का बैक-अप लेना चाहिए। ऐसा करने के लिए आप पहले ब्लॉग में लॉग-इन कर लें। फिर डैश-बोर्ड में जाकर, डिजाइन विकल्प चुने। और फिर एडिट एचटीएमल विकल्प पर क्लिक करें। पूरे एचटीएमएल कोड को कॉपी कर नोट पैड में चिपका लें। फिर उसे डेस्क टॉप पर सेव कर लें।
  • अब एचटीएमएल कोड बॉक्स के स्क्रॉल को नीचे सरकाइये। आपको Group description="Page" selector="body" मिलेगा। इसके नीचे ध्यान से देखिए। 20px Arial, Tahoma, नजर आएगा। यहां Tahoma को अपने पसंसदा फॉट (Siddhanta, Aparajita, Kokila इनमें से कोई एक) से बदल लीजिए। ये फॉट मुफ्त हैं और इन्हें से डाऊनलोड और इंस्टॉल किया जा सकता है।
  • इसी लाइन में एक और Tahoma मिलेगा उसे भी, पहले बदले गए फॉट में बदलिए।
  • स्कॉल नीचे सरकाइये। आगे आपकोGroup description="Blog Title" selector=".header h1"मिलेगा। इसके नीचे के एचटीएमएल वाक्य में Tahoma को अपने पसंदीदा यूनिकोड फॉंट (Siddhanta, Aparajita, Kokila इनमें से कोई एक) से बदल लीजिए।
  • आगे स्क्रॉल करने पर आपको Group description="Blog Description" selector=".header .description" मिलेगा.. इसके आगे के Tahoma को बदलिए।
  • फिर Group description="Tabs Text" selector=".tabs-inner .widget li a" नीचे के Tahoma को।
  • फिर Group description="Date Header" selector=".main-inner .widget h2.date-header, .main-inner .widget h2.date-header span" नीचे के ताहोमा को।
  • फिर Group description="Post Title" selector="h3.post-title, h4, h3.post-title a"ताहोमा को।
  • फिर Group description="Gadget Title" selector="h2" नीचे के ताहोमा को।
  • फिर Group description="Gadget Text" selector=".sidebar .widget"नीचे के ताहोमा को।
काम पूरा होते ही आप SAVE TEMPLATE को सेव कर लें। और अपने ब्लॉग के बदले हुए नक्शे को देखे। बहुत की खूबसूरत, मनोरम, आकर्षक दिखेगा आपका ब्लॉग।

अगर आप इस बदलाव से खुश नहीं हैं तो आपने डेस्कटॉप पर नोट पैड में जो एचटीएमएल कोड का बैक-अप ले रखा है। उसे एचटीएमएल कोड के बॉक्स में चिपकाकर SAVE TEMPLATE कर लें और आपका पुराना ब्लॉग स्वरूप आ जाएगा।

प्रयोग के परिणाम को जरूर बताएं और ब्लॉगिंग की दुनिया को खूबसूरत बनाए।

रविवार, 4 मार्च 2012

मूल चाणक्य नीति

आज से करीब 2300 साल पहले पहले पैदा हुए चाणक्य भारतीय राजनीति और अर्थशास्त्र के पहले विचारक माने जाते हैं। पाटलिपुत्र (पटना) के शक्तिशाली नंद वंश को उखाड़ फेंकने और अपने शिष्य चंदगुप्त मौर्य को बतौर राजा स्थापित करने में चाणक्य का अहम योगदान रहा। ज्ञान के केंद्र तक्षशिला विश्वविद्यालय में आचार्य रहे चाणक्य राजनीति के चतुर खिलाड़ी थे और इसी कारण उनकी नीति कोरे आदर्शवाद पर नहीं, बल्कि व्यावहारिक ज्ञान पर टिकी है। आगे दिए जा रहीं उनकी कुछ बातें भी चाणक्य नीति की इसी विशेषता के दर्शन होते हैं :

- किसी भी व्यक्ति को जरूरत से ज्यादा ईमानदार नहीं होना चाहिए। सीधे तने वाले पेड़ ही सबसे काटे जाते हैं और बहुत ज्यादा ईमानदार लोगों को ही सबसे ज्यादा कष्ट उठाने पड़ते हैं।

- अगर कोई सांप जहरीला नहीं है, तब भी उसे फुफकारना नहीं छोड़ना चाहिए। उसी तरह से कमजोर व्यक्ति को भी हर वक्त अपनी कमजोरी का प्रदर्शन नहीं करना चाहिए।

- सबसे बड़ा गुरुमंत्र : कभी भी अपने रहस्यों को किसी के साथ साझा मत करो, यह प्रवृत्ति तुम्हें बर्बाद कर देगी।

- हर मित्रता के पीछे कुछ स्वार्थ जरूर छिपा होता है। दुनिया में ऐसी कोई दोस्ती नहीं जिसके पीछे लोगों के अपने हित न छिपे हों, यह कटु सत्य है, लेकिन यही सत्य है।

- अपने बच्चे को पहले पांच साल दुलार के साथ पालना चाहिए। अगले पांच साल उसे डांट-फटकार के साथ निगरानी में रखना चाहिए। लेकिन जब बच्चा सोलह साल का हो जाए, तो उसके साथ दोस्त की तरह व्यवहार करना चाहिए। बड़े बच्चे आपके सबसे अच्छे दोस्त होते हैं।

- दिल में प्यार रखने वाले लोगों को दुख ही झेलने पड़ते हैं। दिल में प्यार पनपने पर बहुत सुख महसूस होता है, मगर इस सुख के साथ एक डर भी अंदर ही अंदर पनपने लगता है, खोने का डर, अधिकार कम होने का डर आदि-आदि। मगर दिल में प्यार पनपे नहीं, ऐसा तो हो नहीं सकता। तो प्यार पनपे मगर कुछ समझदारी के साथ। संक्षेप में कहें तो प्रीति में चालाकी रखने वाले ही अंतत: सुखी रहते हैं।

- ऐसा पैसा जो बहुत तकलीफ के बाद मिले, अपना धर्म-ईमान छोड़ने पर मिले या दुश्मनों की चापलूसी से, उनकी सत्ता स्वीकारने से मिले, उसे स्वीकार नहीं करना चाहिए।

- नीच प्रवृति के लोग दूसरों के दिलों को चोट पहुंचाने वाली, उनके विश्वासों को छलनी करने वाली बातें करते हैं, दूसरों की बुराई कर खुश हो जाते हैं। मगर ऐसे लोग अपनी बड़ी-बड़ी और झूठी बातों के बुने जाल में खुद भी फंस जाते हैं। जिस तरह से रेत के टीले को अपनी बांबी समझकर सांप घुस जाता है और दम घुटने से उसकी मौत हो जाती है, उसी तरह से ऐसे लोग भी अपनी बुराइयों के बोझ तले मर जाते हैं।

- जो बीत गया, सो बीत गया। अपने हाथ से कोई गलत काम हो गया हो तो उसकी फिक्र छोड़ते हुए वर्तमान को सलीके से जीकर भविष्य को संवारना चाहिए।

- असंभव शब्द का इस्तेमाल बुजदिल करते हैं। बहादुर और बुद्धिमान व्यक्ति अपना रास्ता खुद बनाते हैं।

- संकट काल के लिए धन बचाएं। परिवार पर संकट आए तो धन कुर्बान कर दें। लेकिन अपनी आत्मा की हिफाजत हमें अपने परिवार और धन को भी दांव पर लगाकर करनी चाहिए।

- भाई-बंधुओं की परख संकट के समय और अपनी स्त्री की परख धन के नष्ट हो जाने पर ही होती है।

- कष्टों से भी बड़ा कष्ट दूसरों के घर पर रहना है।

आचार्य चाणक्य एक ऐसी महान विभूति थे, जिन्होंने अपनी विद्वत्ता और क्षमताओं के बल पर भारतीय इतिहास की धारा को बदल दिया। मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चाणक्य कुशल राजनीतिज्ञ, चतुर कूटनीतिज्ञ, प्रकांड अर्थशास्त्री के रूप में भी विश्वविख्‍यात हुए। इतनी सदियाँ गुजरने के बाद आज भी यदि चाणक्य के द्वारा बताए गए सिद्धांत ‍और नीतियाँ प्रासंगिक हैं तो मात्र इसलिए क्योंकि उन्होंने अपने गहन अध्‍ययन, चिंतन और जीवानानुभवों से अर्जित अमूल्य ज्ञान को, पूरी तरह नि:स्वार्थ होकर मानवीय कल्याण के उद्‍देश्य से अभिव्यक्त किया।

वर्तमान दौर की सामाजिक संरचना, भूमंडलीकृत अर्थव्यवस्था और शासन-प्रशासन को सुचारू ढंग से बताई गई ‍नीतियाँ और सूत्र अत्यधिक कारगर सिद्ध हो सकते हैं। चाणक्य नीति के द्वितीय अध्याय से यहाँ प्रस्तुत हैं कुछ अंश -

1. जिस प्रकार सभी पर्वतों पर मणि नहीं मिलती, सभी हाथियों के मस्तक में मोती उत्पन्न नहीं होता, सभी वनों में चंदन का वृक्ष नहीं होता, उसी प्रकार सज्जन पुरुष सभी जगहों पर नहीं मिलते हैं।

2. झूठ बोलना, उतावलापन दिखाना, दुस्साहस करना, छल-कपट करना, मूर्खतापूर्ण कार्य करना, लोभ करना, अपवित्रता और निर्दयता - ये सभी स्त्रियों के स्वाभाविक दोष हैं। चाणक्य उपर्युक्त दोषों को स्त्रियों का स्वाभाविक गुण मानते हैं। हालाँकि वर्तमान दौर की शिक्षित स्त्रियों में इन दोषों का होना सही नहीं कहा जा सकता है।

3. भोजन के लिए अच्छे पदार्थों का उपलब्ध होना, उन्हें पचाने की शक्ति का होना, सुंदर स्त्री के साथ संसर्ग के लिए कामशक्ति का होना, प्रचुर धन के साथ-साथ धन देने की इच्छा होना। ये सभी सुख मनुष्य को बहुत कठिनता से प्राप्त होते हैं।

4. चाणक्य कहते हैं कि जिस व्यक्ति का पुत्र उसके नियंत्रण में रहता है, जिसकी पत्नी आज्ञा के अनुसार आचरण करती है और जो व्यक्ति अपने कमाए धन से पूरी तरह संतुष्ट रहता है। ऐसे मनुष्य के लिए यह संसार ही स्वर्ग के समान है।

5. चाणक्य का मानना है कि वही गृहस्थी सुखी है, जिसकी संतान उनकी आज्ञा का पालन करती है। पिता का भी कर्तव्य है कि वह पुत्रों का पालन-पोषण अच्छी तरह से करे। इसी प्रकार ऐसे व्यक्ति को मित्र नहीं कहा जा सकता है, जिस पर विश्वास नहीं किया जा सके और ऐसी पत्नी व्यर्थ है जिससे किसी प्रकार का सुख प्राप्त न हो।

6. जो मित्र आपके सामने चिकनी-चुपड़ी बातें करता हो और पीठ पीछे आपके कार्य को बिगाड़ देता हो, उसे त्याग देने में ही भलाई है। चाणक्य कहते हैं कि वह उस बर्तन के समान है, जिसके ऊपर के हिस्से में दूध लगा है परंतु अंदर विष भरा हुआ होता है।

7. चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति अच्छा मित्र नहीं है उस पर तो विश्वास नहीं करना चाहिए, परंतु इसके साथ ही अच्छे मित्र के संबंद में भी पूरा विश्वास नहीं करना चाहिए, क्योंकि यदि वह नाराज हो गया तो आपके सारे भेद खोल सकता है। अत: सावधानी अत्यंत आवश्यक है।

8. चाणक्य का मानना है कि व्यक्ति को कभी अपने मन का भेद नहीं खोलना चाहिए। उसे जो भी कार्य करना है, उसे अपने मन में रखे और पूरी तन्मयता के साथ समय आने पर उसे पूरा करना चाहिए।

9. चाणक्य का कहना है कि मूर्खता के समान यौवन भी दुखदायी होता है क्योंकि जवानी में व्यक्ति कामवासना के आवेग में कोई भी मूर्खतापूर्ण कार्य कर सकता है। परंतु इनसे भी अधिक कष्टदायक है दूसरों पर आश्रित रहना।

10. चाणक्य कहते हैं कि बचपन में संतान को जैसी शिक्षा दी जाती है, उनका विकास उसी प्रकार होता है। इसलिए माता-पिता का कर्तव्य है कि वे उन्हें ऐसे मार्ग पर चलाएँ, जिससे उनमें उत्तम चरित्र का विकास हो क्योंकि गुणी व्यक्तियों से ही कुल की शोभा बढ़ती है।

11. वे माता-पिता अपने बच्चों के लिए शत्रु के समान हैं, जिन्होंने बच्चों को ‍अच्छी शिक्षा नहीं दी। क्योंकि अनपढ़ बालक का विद्वानों के समूह में उसी प्रकार अपमान होता है जैसे हंसों के झुंड में बगुले की स्थिति होती है। शिक्षा विहीन मनुष्य बिना पूँछ के जानवर जैसा होता है, इसलिए माता-पिता का कर्तव्य है कि वे बच्चों को ऐसी शिक्षा दें जिससे वे समाज को सुशोभित करें।

12. चाणक्य कहते हैं कि अधिक लाड़ प्यार करने से बच्चों में अनेक दोष उत्पन्न हो जाते हैं। इसलिए यदि वे कोई गलत काम करते हैं तो उसे नजरअंदाज करके लाड़-प्यार करना उचित नहीं है। बच्चे को डाँटना भी आवश्यक है।

13. शिक्षा और अध्ययन की महत्ता बताते हुए चाणक्य कहते हैं कि मनुष्य का जन्म बहुत सौभाग्य से मिलता है, इसलिए हमें अपने अधिकाधिक समय का वे‍दादि शास्त्रों के अध्ययन में तथा दान जैसे अच्छे कार्यों में ही सदुपयोग करना चाहिए।

14. जिस प्रकार पत्नी के वियोग का दुख, अपने भाई-बंधुओं से प्राप्त अपमान का दुख असहनीय होता है, उसी प्रकार कर्ज से दबा व्यक्ति भी हर समय दुखी रहता है। दुष्ट राजा की सेवा में रहने वाला नौकर भी दुखी रहता है। निर्धनता का अभिशाप भी मनुष्य कभी नहीं भुला पाता। इनसे व्यक्ति की आत्मा अंदर ही अंदर जलती रहती है।

15. चाणक्य के अनुसार नदी के किनारे स्थित वृक्षों का जीवन अनिश्चित होता है, क्योंकि नदियाँ बाढ़ के समय अपने किनारे के पेड़ों को उजाड़ देती हैं। इसी प्रकार दूसरे के घरों में रहने वाली स्त्री भी किसी समय पतन के मार्ग पर जा सकती है। इसी तरह जिस राजा के पास अच्छी सलाह देने वाले मंत्री नहीं होते, वह भी बहुत समय तक सुरक्षित नहीं रह सकता। इसमें जरा भी संदेह नहीं करना चाहिए।

16. चाणक्य कहते हैं कि जिस तरह वेश्या धन के समाप्त होने पर पुरुष से मुँह मोड़ लेती है। उसी तरह जब राजा शक्तिहीन हो जाता है तो प्रजा उसका साथ छोड़ देती है। इसी प्रकार वृक्षों पर रहने वाले पक्षी भी तभी तक किसी वृक्ष पर बसेरा रखते हैं, जब तक वहाँ से उन्हें फल प्राप्त होते रहते हैं। अतिथि का जब पूरा स्वागत-सत्कार कर दिया जाता है तो वह भी उस घर को छोड़ देता है।

1७. बुरे चरित्र वाले, अकारण दूसरों को हानि पहुँचाने वाले तथा अशुद्ध स्थान पर रहने वाले व्यक्ति के साथ जो पुरुष मित्रता करता है, वह शीघ्र ही नष्ट हो जाता है। आचार्य चाणक्य का कहना है मनुष्य को कुसंगति से बचना चाहिए। वे कहते हैं कि मनुष्य की भलाई इसी में है कि वह जितनी जल्दी हो सके, दुष्ट व्यक्ति का साथ छोड़ दे।

1८. चाणक्य कहते हैं कि मित्रता, बराबरी वाले व्यक्तियों में ही करना ठीक रहता है। सरकारी नौकरी सर्वोत्तम होती है और अच्छे व्यापार के लिए व्यवहारकुशल होना आवश्यक है। इसी तरह सुंदर व सुशील स्त्री घर में ही शोभा देती है।