हिंदी शोध संसार

बुधवार, 28 मई 2014

नरेंद्र मोदी का मंत्रिमंडल


मंत्री मंडल की सूची
कैबिनेट मंत्री
1
नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग एवं वैसे सभी विभाग जो अन्य मंत्री को आवंटित नहीं किए गए हैं।
2
राजनाथ सिंह
गृह
3
सुषमा स्वराज
विदेश, अप्रवासी भारतीय मामले
4
अरुण जेटली
वित्त, कॉर्पोरेट मामले और रक्षा
5
एम वेंकैया नायडू
शहरी विकास, गृह निर्माण और शहरी गरीबी उन्मूलन, संसदीय मामले
6
नितिन जयराम गडकरी
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, जहाजरानी
7
डीवी सदानंद गौड़ा
रेलवे
8
उमा भारती
जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनर्रुद्धार
9
नजमा हेपतुल्ला
अल्पसंख्यक मामले
10
गोपीनाथ मुंडे
ग्रामीण विकास, पंचायती राज, पेयजल और स्वच्छता
11
रामविलास पासवान
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं जन वितरण
12
कलराज मिश्र
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम
13
मेनका गांधी
महिला एवं बाल विकास
14
अनंत कुमार
रसायन एवं उर्वरक
15
रविशंकर प्रसाद
संचार एवं सूचना तकनीक, विधि एवं न्याय
16
अशोक गजपति राजू पुसपति
नागरिक उड्ड्यन
17
अनंत गीते
भारी उद्योग एवं लोक उद्यम
18
हरसिमरत कौर बादल
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग
19
नरेंद्र सिंह तोमर
खनन, इस्पात, श्रम एवं रोजगार
20
जुअल ओराम
आदिवासी मामले
21
राधा मोहन सिंह
कृषि
22
थावर चंद गहलोत
सामाजिक कल्याण और सशक्तिकरण
23
स्मृति जुबिन ईरानी
मानव संसाधन विकास
24
डॉ हर्ष वर्द्धन
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण

राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
1
वी के सिंह
पूर्वोत्तर क्षेत्र का विकास (स्वतंत्र प्रभार), विदेश राज्यमंत्री, अप्रवासी भारतीय मामलों के राज्यमंत्री
2
इंद्रजीत सिंह राव
योजना मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार), सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन (स्वतंत्र प्रभार), रक्षा राज्यमंत्री
3
संतोष गंगवार
कपड़ा मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार), संसदीय मामलों के राज्यमंत्री, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनर्रुद्धार राज्य मंत्री
4
श्रीपद येसो नायक
संस्कृति एवं पर्यटन(स्वतंत्र प्रभार)
5
धर्मेंद्र प्रधान
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस (स्वतंत्र प्रभार)
6
सर्वानंद सोनोवाल
कौशल विकास, उद्यमिता, युवा मामले और खेल (स्वतंत्र प्रभार)
7
प्रकाश जावड़ेकर
सूचना एवं प्रसारण, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन (स्वतंत्र प्रभार), संसदीय मामलों के राज्यमंत्री
8
पीयूष गोयल
ऊर्जा, कोयला, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा (स्वतंत्र प्रभार)
9
जितेंद्र सिंह
विज्ञान एवं तकनीक, पृथ्वी विज्ञान (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्यमंत्री, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष विभाग राज्यमंत्री
10
निर्मला सीतारमण
वाणिज्य एवं उद्योग (स्वतंत्र प्रभार), वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों के राज्यमंत्री


राज्यमंत्री
1
जी एम सिद्धेश्वर
नागरिक उड्ड्यन
2
मनोज सिन्हा
रेलवे
3
निहाल चंद
रसायन एवं उर्वरक
4
उपेंद्र कुशवाहा
ग्रामीण विकास, पंचायती राज, पेयजल एवं स्वच्छता
5
राधाकृष्णन पी
भारी उद्योग और लोक उद्यम
6
किरेन रिजिजु
गृह
7
कृष्णन पाल
सड़क परिवहन, राजमार्ग, जहाजरानी
8
संजीव कुमार बाल्यान
कृषि, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग
9
मनसुखभाई वासवा
आदिवासी मामले
10
रावसाहेब दादाराव दन्वे
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं लोक वितरण
11
विष्णु देव साई
खनन, इस्पात, श्रम एवं रोजगार
12
सुदर्शन भगत
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता

रविवार, 27 अप्रैल 2014

प्रतिक्रिया

अकबर के दरबार में चार चोरों को पेश किया गया। चारों पर नगर के एक सेठ के घर में चोरी का
आरोप था। अकबर ने बीरबल से मामले की सुनवाई करने और फैसला सुनाने को कहा। अन्य दरबारियों को अकबर के इस फैसले से जलन हुई, लेकिन उन्होंने बादशाह के डर से मुंह नहीं खोला। सब के सब मौके की ताक में थे।
बीरबल ने मुकदमे की सुनवाई की और फैसला सुनाया। पहले चोर से बीरबल ने कहा, "आपसे ऐसी उम्मीद नहीं थी। अब आपको क्या कहें, आप जाइये।" दरबार में मौजूद लोग बीरबल के फैसले से आश्चर्यचकित थे। वे दूसरे चोर को सुनाई जाने वाली सजा की प्रतिक्षा कर रहे थे।
दूसरे चोर को बीरबल ने जबर्दस्त डांट पिलाई और गालियां देते हुए कहा, "शर्म नहीं आई चोरी करते हुए। हरामजादे, चल भाग यहां से, नहीं तो ऐसी मार पड़ेगी कि नानी याद आ आएगी।" दूसरे चोर के प्रति बीरबल के व्यवहार ने सबको हैरत में डाल दिया। पहले चोर को "आप" कहने वाला बीरबल दूसरे चोर को हरामजादा कैसे कह सकता है। मगर किसी में मुंह खोलने की हिम्मत नहीं थी।
बारी थी तीसरे चोर की। सबकी नजरें तीसरे चोर पर ठहर गई। तीसरा चोर मार खाने के लिए तैयार था। बीरबल ने उसकी मनोकामना पूरी कर दी। तीसरे चोर को खूब पिटवाया। तीसरे चोर के साथ बीरबल का मार-पीट पूर्ण व्यवहार किसी को अच्छा नहीं लगा। बीरबल के खिलाफ कानाफूसी होने लगी। मगर, सबसे अहम चौथे चोर के खिलाफ बीरबल का फैसला आना बाकी था।
बीरबल ने चौथे चोर को आधा सिर मुंडवाकर उस पर कालिख चूना लगाकर गधे पर बैठाकर पूरे शहर में घुमवाने का फैसला सुनाया।
बादशाह अकबर की न्यायप्रियता से यहां हर कोई वाकिफ था, लेकिन उनके सामने बीरबल एक अपराध के लिए चार चोरों को अलग-अलग सजा सुनाएगा, ये फैसला किसी को मंजूर नहीं था। दरबारियों में ही विरोध के स्वर फूट पड़े। जहांपनाह भी हरकत में आ गए। बीरबल से कहा, बीरबल, तुम्हारे न्याय पर कुछ लोगों को एतराज है, उनकी शंकाएं दूर करो।
बीरबल को पहले से पता था कि ऐसा ही कुछ होगा और वो भी पहले से इसके लिए तैयार था। उसने उन चारों के पीछे एक-एक दूत लगा दिए और लोगों से एक सप्ताह तक प्रतीक्षा करने का अनुरोध किया।
एक सप्ताह बाद दूतों ने जो समाचार लाए, वो चौंकाने वाले थे। पता चला कि पहले चोर ने दरबार छोड़ते ही आत्महत्या कर ली। दूसरे चोर के बारे में खबर आई कि वो नगर छोड़कर बाहर चला गया है और पिछले एक सप्ताह में किसी को नजर नहीं आया। तीसरे चोर ने पिछले एक सप्ताह से खुद को अपने ही घर में बंद कर रखा है। जबकि चौथा चोर गदहे पर बैठकर मस्ती में आने जाने वालों को गाली देता था। ताली बजाने वालों पर थूकता था। जो उसकी ओर देखते थे वो उनको देख लेने की धमकी देता था। रास्ते में उसकी पत्नी मिली तो वो बोला, जा चमेली, पानी भर कर रखना, इन गधों को घूमाकर आ रहा हूं।
समाचार सुनने के बाद सब के सब मौन हो गए, बीरबल से किसी को कोई शिकायत नहीं बची।

रविवार, 22 दिसंबर 2013

Aam Aadamy Party Manifesto For Delhi


18 Point Programme for the betterment of Delhi and the people of Delhi

No leaders and ministers of Delhi government will ask for red beacon van, big flats and security for themselves.
  • Lokpal will investigate all the scams committed by Congress and Governments.
  • Swaraj laws will be implemented in Delhi for self-government and decentralisation of the government.
  • No MLA will be given MLA fund and these funds will be directly transferred to wards and gram Sabhas.
  • A formal state status will be given to Delhi
  • The accounts of the electricity companies will be done and electricity charges will be slashed to half.
  • The fast running electricity meters will be regulated.
  • 700 Litres of drinking water will be provided to each family at no cost.
  • All illegal colonies will be legalized within one year of government formation.
  • No slum huts will be demolished till the pucca building is provided to the poors.
  • No contract labour will be employed for permanent and regular work
  • VAT rules will be simplified,
  • There will be no FDI in retail sector
  • All subsidies will be provided to the farmers of Delhi, what are being provided to the other states of the country.
  • The quality of education in government school will be better than the private schools
  • More than 500 government schools will be opened in Delhi
  • Donation system prevalent in private schools will be eradicated and fees rules will be made transparent.
  • New government hospitals will be opened and medical services better than private hospitals will be provided in government hospitals
  • Special security cell will be set up for the security of women
  • More fast track courts will be set up so that the cases against women wold be solved within 3 to 6 months
  • More courts will be set up and judges will the recruited so that cases can be solved within one year
  • National parties should support AAP on national issues.
    based on the speech of Arvind kejriwal, national convener of AAM AADAMI PARTY during referendum on government formation

बुधवार, 25 सितंबर 2013

पते की बात

"When you see that in order to produce, you need to obtain permission from men who produce nothing - When you see that money is flowing to those who deal, not in goods, but in favors - When you see that men get richer by graft and by pull than by work, and your laws don’t protect you against them, but protect them against you - When you see corruption being rewarded and honesty becoming a self-sacrifice - You may know that your society is doomed."

  • जब कोई काम करने के लिए उस व्यक्ति से अनुमति की जरूरत पड़े जो कुछ करता ही नहीं।
  • जब पैसे उन्हें दिए जाते हैं जो योग्यता के बजाय किसी के एहसान या पक्ष में काम करता है
  • जब लोग टांग खिंचाई और घूस देकर अमीर बनते हैं और आपका कानून इन लोगों से आपको नहीं बचाता है बल्कि आपसे इन लोगों को बचाता है
  • जब भ्रष्टाचार पुरस्कृत होता हो और ईमानदारी आत्म-बलिदान बन जाती हो
    ...............तो आपको समझना चाहिए कि समाज बर्बाद हो चुका है, नष्ट हो चुका और ध्वस्त हो चुका है। 

    -- Ayn Rand, "Atlas Shrugged", 1957 

सोमवार, 23 सितंबर 2013

विवादों और चुनौतियों के प्रखर पुरुष नरेंद्र मोदी

कौन कहता है कि विवादों से इन्सान का कद घट जाता है। विवाद और चुनौतियां तो वक्त के वो पैमाने हैं जिससे इंसान की ऊंचाई मापी जाती है। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में तो कम से कम यही कहा जा सकता है। खुद मोदी ने कहा था कि
लोग मुझपर पत्थर फेंकते रहे, लेकिन मैंने कभी पलटकर जवाब नहीं दिया, बल्कि उन पत्थरों को चुना और उसी से गुजरात के विकास का मार्ग बनाया।
                         17 सितंबर 2011 गुजरात सद्भावना उपवास
दरअसल, विवादों और चुनौतियों के बीच कोई इंसान कहां खड़ा रहता है, उसी से लोग उसकी ऊंचाई मापते हैं। जहां तक बात मोदी की है तो उन्होंने खुद विवादों और चुनौतियों का रास्ता चुना। एक ओर, 2002 के गुजरात दंगों को लेकर तथाकथित सेक्यूलर जमात ने संसद से सड़क और सड़कों से अदालत तक उनके खिलाफ मोर्चा खोला.. तो दूसरी ओर, सड़क बनवाने के लिए जब उन्होंने मंदिरों को गिराया तो आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद जैसे दक्षिण पंथी संगठन उनके खिलाफ हो गए। इसी साल पंद्रह अगस्त जब उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समांतर खड़ा होकर उनकी निष्ठा पर सवाल उठाए तो खुद उनकी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता उनके खिलाफ हो गए। मगर, इन विरोधों और आलोचनाओं का मोदी पर कोई असर होता नहीं दिखा। वो बार-बार और हर बार अपने ही बनाये रास्तों पर चलने को तत्पर दिखे। कई लोगों को लगा कि खुद को भीड़ से अलग देखने और दिखाने का फैशन दरअसल मोदी का पैशन है। इसी फैशन और पैशन का ही तो दूसरा नाम युवावस्था है। देखते ही देखते मोदी युवा-हृदय सम्राट बन गए। मोदी आज उन युवाओं के दिलों की धड़कन बन गए जिसमें लीक से हटकर कुछ कर गुजरने का जूनुन है। ये जुनून गमले में कुकुरमु्त्ता नहीं, बल्कि कीचड़ में कमल खिलाना चाहता है। निराशा की ऊर्वर धरा से पैदा हुई ये वो घास है जो ना सिर्फ बरगद की समीक्षा करने का माद्दा रखती है, बल्कि चींटी बनकर पागल हाथी को भी घुटने टेकने के लिए मजबूर कर सकती है।
इन विवादों और चुनौतियों के बीच मोदी ने अपनी छवि एक विकास पुरुष की बनायी। चाय की दुकान से शुरू होकर प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बनने तक की उनकी जीवन यात्रा में कई पड़ाव आए। विद्यार्थी परिषद और आरएसएस के रास्ते वो भारतीय जनता पार्टी से जुड़े। राजनीतिक जीवन के शुरूआती दिनों में ही मोदी ने साबित कर दिया वो औरों से अलग हैं। नरेंद्र मोदी गुजरात में 1995 और 1998 के विधानसभा चुनावों के प्रमुख रणनीतिकार रहे। यही वजह है कि 2001 में उपचुनावों में हार के बाद जब केशुभाई पटेल ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया तो पार्टी ने मोदी को गुजरात की कुर्सी सौंपने में जरा भी देर नहीं लगाई। मोदी जब एक बार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठ गए तो फिर उनके समक्ष अब तक कोई चुनौती नहीं पेश कर सका। मोदी लगातार चौथी बार गुजरात के मुख्यमंत्री पद की कुर्सी पर बने हुए हैं।
2002 में गोधरा में ट्रेन जलाए जाने की घटना के बाद प्रदेश में भड़की सांप्रदायिक हिंसा के लिएनरेंद्र मोदी की खूब आलोचना हुई, मगर मोदी के शासनकाल में गुजरात ने सतत विकास की नई ऊंचाईयों को छुआ, जिसके लिए देश विदेश में उनकी तारीफों के पुल बांधे गए।
मोदी प्रशासन की सबसे ज्यादा तारीफ गैर-सरकारी संगठनों और समुदायों की हौसला अफजाई के लिए हुई, जिनकी मदद से गुजरात में आधारभूत संरचना का जाल बुना गया, जिसने भूमिगत जल स्रोतों के संरक्षण में अहम भूमिका निभाई। एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2008 के अंत तक गुजरात में जिन पांच लाख ढांचे बनाए गए, उनमें एक लाख तेरह हजार सात सौ अड़तीस चेक डैम हैं। इन प्रयासों के गुजरात में कृषि क्षेत्र का कायाकल्प हुआ। मोदी के कुशल नेतृत्व का विरोधियों ने भी लोहा माना।
जहां तक बात राष्ट्रीय राजनीति की है तो 1995 में मोदी भाजपा के महासचिव और 1998 में राष्ट्रीय सचिव बनाए गए। इससे पहले नब्बे के दशक में जब लालकृष्ण आडवाणी ने रथयात्राएं की तो नरेंद्र मोदी भी उनके साथ थे।
विकास, विवाद और चुनौतियों के बीच आज जब नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय राजनीति का नया अध्याय लिखने के लिए अग्रसर हैं तो उनपर विवाद स्वाभाविक है। भाजपा के जिस पितामह ने 2002 के गुजरात दंगों के बाद मोदी का बचाव किया, वो आज मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने के खिलाफ हैं। आखिर सवाल उठता है कि विवाद और चुनौतियां मोदी को छोड़कर जाएं तो जाएं कहां।

शनिवार, 31 अगस्त 2013

हिंदू धर्म पर सारे सवालों के जवाब- इंसाक्लोपीडिया ऑन हिंदूइज्म प्रकाशित

हिंदू धर्म के बारे में अगर कोई सवाल आपके मन में शेष है तो आपकी मदद के लिए इंसाइक्लोपीडिया ऑफ हिंदूइज्म ग्यारह खंडों में प्रकाशित हुआ है। Eò®úÒ¤É BEò ½þVÉÉ®ú Ê´ÉuùÉxÉÉäÆ Eäò {ÉSSÉÒºÉ ´É¹ÉÉæÆ EòÒ +lÉEò ¨Éä½þxÉiÉ EòÒ ¤ÉnùÉè±ÉiÉ Ê½þÆnÚù <ƺÉÉछब्बीस अगस्त को इस <ºÉ Ê´É·ÉEòÉä¶É का विमोचन किया गया।
ʽþÆnÚù Ê´É·ÉEòÉä¶É ʴɨÉÉäSÉxÉ EòɪÉÇGò¨É ¨ÉäÆ xÉÉä¤Éä±É {ÉÖ®úºEòÉ®ú Ê´ÉVÉäiÉÉ +É®ú Eäò {ÉSÉÉè®úÒ, ´ÉÊ®ú¹`ö ºÉ¨ÉÉVɺÉä´ÉÒ +zÉÉ ½þVÉÉ®äú, <ÆÊb÷ªÉÉ ½äþÊ®ú]äõVÉ Ê®úºÉSÉÇ ¡òÉ=Æbä÷¶ÉxÉ Eäò ºÉƺlÉÉ{ÉEò +Éè®ú {É®ú¨ÉÉlÉÇ ÊxÉEäòiÉxÉ +É¸É¨É Eäò +vªÉIÉ º´ÉɨÉÒ ÊSÉnùÉxÉÆnù ºÉ®úº´ÉiÉÒ ¨ÉÉèVÉÚnù ®ú½ä

´ÉÒ+Éä.. MªÉÉ®ú½þ JÉÆb÷ÉäÆ ¨ÉäÆ |ÉEòÉʶÉiÉ Ê½þÆnÚù Ê´É·ÉEòÉä¶É ¨ÉäÆ Ê½þnÚù vɨÉÇ Eäò +ÉvªÉÉÎi¨ÉEò Ê´É·ÉɺÉ, ¨ÉÉxªÉÉ+ÉäÆ, nù¶ÉÇxÉ, {ÉÚVÉÉ-Ê´ÉÊvÉ, <ÊiɽþɺÉ, ºÉ¦ªÉiÉÉ, ¦ÉɹÉÉ, ºlÉÉ{ÉiªÉ Eò±ÉÉ, xÉÞiªÉ, ºÉÆMÉÒiÉ, +Éè¹ÉÊvÉÊ´ÉYÉÉxÉ, Ê´ÉYÉÉxÉ, Eò±ÉÉ, ºÉɨÉÉÊVÉEò ºÉƺlÉÉ+ÉäÆ +Éè®ú ¨Éʽþ±ÉÉ+ÉäÆ EòÒ ¦ÉÚʨÉEòÉ Ê´É¹ÉªÉÉäÆ {É®ú ºÉÉiÉ ½þVÉÉ®ú Eäò +ÊvÉEò +ɱÉäJÉ ½èþÆ* BEò ½þVÉÉ®ú ºÉä +ÊvÉEò ®ÆúMÉÒxÉ ÊSÉjÉ +Éè®ú ®äúJÉÉÊSÉjÉ Ê´É¹ÉªÉÉäÆ EòÉä VÉÒ´ÉÆiÉ ¤ÉxÉÉ näùiÉä ½èþÆ* Ê´É·ÉEòÉä¶É EòÉ ºÉÆEò±ÉxÉ +Éè®ú ÊxɨÉÉÇhÉ <ÆÊb÷ªÉÉ ½äþÊ®ú]äõVÉ Ê®úºÉSÉÇ ¡òÉ=Æbä÷¶ÉxÉ xÉä ÊEòªÉÉ* +Éè®ú <ºÉEòÉ |ÉEòɶÉxÉ ¨ÉÆb÷±ÉÉ {ÉΤ±ÉʶÉÆMÉ xÉä ÊEòªÉÉ ½èþ* ʽþÆnÚù Ê´É·ÉEòÉä¶É xÉɨÉEò <ºÉ ¨É½þi´ÉÉEòÉÆIÉÒ {ÉÊ®úªÉÉäVÉxÉÉ {É®ú Eò®úÒ¤É BEò ½þVÉÉ®ú Ê´ÉuùÉxÉÉäÆ xÉä Eò®úÒ¤É {ÉSSÉÒºÉ ºÉɱÉÉäÆ iÉEò +lÉEò ¨Éä½þxÉiÉ ÊEòªÉÉ* ºÉÉ=lÉ Eèò®úÉäʱÉxÉÉ Ê´É·ÉÊ´ÉtÉ±ÉªÉ ¨ÉäÆ ¨ÉäÊb÷ºÉÒxÉ Ê´É¦ÉÉMÉ Eäò b÷ÒxÉ b÷Éì ¨ÉÒ®úÉ xÉ®úʺɨ½þxÉ xÉä <ºÉ Ê´É·ÉEòÉä¶É EòÉä ¨ÉÉxÉ´ÉiÉÉ Eäò ʱÉB BEò +xÉÖ{É¨É ={ɽþÉ®ú ¤ÉiÉɪÉÉ ½èþ.. VÉÉä ¦ÉÉ®úiÉ Eäò +ÉvªÉÉÎi¨ÉEò +Éè®ú ºÉÉƺEÞòÊiÉEò vÉ®úÉä½þ®ú EòÉ ´ªÉÉ{ÉEò ºÉÆEò±ÉxÉ ½èþ* ´É½þÒÆ, Ê´É·ÉÊ´ÉtÉ±ÉªÉ Eäò BEò +xªÉ |ÉÉä¡äòºÉ®ú ½þÉ±É £äòÆSÉ xÉä <ºÉä ¶ÉÉävÉ +Éè®ú +vªÉªÉxÉ Eäò ʱÉB ¨ÉÒ±É EòÉ {ÉilÉ®ú ¤ÉiÉɪÉÉ ½èþ* ªÉ½þ ºÉÆnù¦ÉÇ OÉÆlÉ ¦ÉÉ®úiÉ +Éè®ú nÖùÊxɪÉɦɮú ¨ÉäÆ ¡èò±Éä ʽþÆnÖù+ÉäÆ +Éè®ú +xªÉ vɨÉÉǴɱÉÆʤɪÉÉäÆ EòÉä ʽþÆnÚù vɨÉÇ, ¦ÉÉ®úiÉ EòÒ ºÉ¦ªÉiÉÉ +Éè®ú ºÉƺEòÊiÉ Eäò ¤ÉÉ®äú ¨ÉäÆ ºÉ¨ÉZÉ Ê´ÉEòʺÉiÉ Eò®úxÉä ¨ÉäÆ ¨Énùnù Eò®äúMÉÒ* MªÉÉ®ú½þ JÉÆb÷ÉäÆ ¨ÉäÆ |ÉEòÉʶÉiÉ <ºÉ Ê´É·ÉEòÉä¶É EòÉ ½þ®äúEò JÉÆb÷ Uô½þ ºÉä ºÉÉiÉ ºÉÉè {ÉÞ¹`öÉäÆ EòÉ ½èþ. {ɽþ±Éä ºÉƺEò®úhÉ ¨ÉäÆ Ê´É·ÉEòÉä¶É EòÒ iÉÒxÉ ½þVÉÉ®ú |ÉÊiɪÉÉÆ |ÉEòÉʶÉiÉ EòÒ VÉÉ ®ú½þÒ ½èþ* +ɤÉÉnùÒ Eäò ʱɽþÉVÉ ºÉä ʽþÆnÚù.. <ǺÉÉ<Ç +Éè®ú <º±ÉÉ¨É Eäò ¤ÉÉnù nÖùÊxɪÉÉ EòÉ iÉҺɮúÉ ºÉ¤ÉºÉä ¤Éc÷É vɨÉÇ ½èþ.. +Éè®ú Eò®úÒ¤É BEò +®ú¤É ±ÉÉäMÉ <ºÉ vɨÉÇ Eäò +xÉÖªÉɪÉÒ ½èþ* ªÉ½þ vɨÉÇ ¨ÉÉxÉ´ÉiÉÉ Eäò <ÊiɽþÉºÉ Eäò |ÉÉSÉÒxÉiÉ¨É EòÉ±É ºÉä ¨ÉÉèVÉÚnù ½èþ* ʺÉÆvÉÖ PÉÉ]õÒ EòÒ MÉÉänù ¨ÉäÆ {ÉxÉ{ÉÒ ÊºÉÆvÉÖ ºÉ¦ªÉiÉÉ ¨ÉÉxÉ´ÉiÉÉ Eäò <ÊiɽþÉºÉ Eäò ºÉ¤ÉºÉä ºÉÖxɽþ®äú +vªÉɪÉÉäÆ ¨ÉäÆ ºÉä BEò ½èþ* <ºÉ ºÉ¦ªÉiÉÉ {É®ú +xÉÊMÉxÉiÉ +ÉJªÉÉxÉ, ´ªÉÉJªÉÉxÉ +Éè®ú ¶ÉÉävÉ Ê±ÉJÉä VÉÉ SÉÖEäò ½èþÆ.. ±ÉäÊEòxÉ ªÉä +vªÉªÉxÉ {ÉÚ®ú¤É +Éè®ú {ÉζSÉ¨É Eäò Ê´ÉuùÉxÉÉäÆ +{ÉxÉä-+{ÉxÉä oùι]õEòÉähÉ ºÉä ÊEòB* SÉÚÆÊEò ¦ÉÉ®úiÉÒªÉ ºÉƺEÞòÊiÉ xÉä ºÉ¦ÉÒ vɨÉÇ +Éè®ú ºÉƺEÞòÊiÉ EòÉä ºÉiªÉ Eäò °ü{É ¨ÉäÆ º´ÉÒEòÉ®ú ÊEòªÉÉ +Éè®ú ºÉ¦ÉÒ EòÉä ¶É®úhÉ ÊnùªÉÉ* <ºÉʱÉB ʽþÆnÚù Ê´É·ÉEòÉä¹É {ÉÊ®úªÉÉäVÉxÉÉ ¨ÉäÆ MÉè®ú-ʽþÆnÚù Ê´ÉuùÉxÉÉäÆ ºÉä ¦ÉÒ ¨Énùnù ±ÉÒ MÉ<Ç* BäºÉÒ =¨¨ÉÒnù EòÒ VÉÉ ®ú½þÒ ½èþ ÊEò ʽþÆnÚù Ê´É·ÉEòÉä¶É ¦ÉÉ®úiÉÒªÉ ºÉ¦ªÉiÉÉ, ºÉƺEÞòÊiÉ, ʽþÆnÚù vɨÉÇ, ºÉÉ´ÉǦÉÉèʨÉEò स्वीकार्यता Eäò ʺÉrùÉÆiÉ +Éè®ú ʽþÆnÚù nù¶ÉÇxÉ EòÉä ºÉ¨ÉZÉxÉä ¨ÉäÆ ¨Énùnù Eò®äúMÉÉ*

हिंदू विश्वकोष को बारह खंडों में बांटा गया है-
  1. दुनियाभर में हिंदू- नेपाल, दक्षिणपूर्व एशिया, आस्ट्रेलिया, यूरोप, अमेरिका, मॉरिशस, अफ्रीका और कैरिबियन द्वीप
  2. भाषा एवं साहित्य- संस्कृत, भारतीय भाषाओं में लिखे साहित्य, भाषा विज्ञान।
  3. दर्शन- आध्यात्म, मनोविज्ञान,, वेदांग, छह दर्शन, जैन, बौद्ध, सिख चिंतन, तंत्र, शैव्य सिद्धांत और समसामयिक हिंदू चिंतन
  4. राजव्यवस्था- राजनीतिक संस्थाएं, न्याय व्यवस्था, अर्थशास्त्र, विधि-व्यवस्था, न्याय व्यवस्था और शस्र-अस्त्र
  5. धर्म और आध्यात्म- धर्म शास्त्र, श्रुति, स्मृति, पुराण, इतिहास, सूत्र, भाष्य, शास्त्र, शाक्त, पवित्र स्थल, साप्रदायिक आंदोलन, मंदिर, आधुनिक आंदोलन
  6. विज्ञान- आयुर्वेद, खगोलशास्त्र, ज्योतिषशास्त्र, गणित, रसायन व अन्य
  7. सामाजिक संस्थाएं और आंदोलन- शिक्षा, वर्णाश्रम, धर्म, जाति, जनजाति और उनकी प्रथाएं, महिलाओं की स्थिति, भोज, खान-पान, त्योहार, आहार, पहनावा और साज-श्रृंगार
  8. आध्यात्मिक अनुशासन- कर्मयोग, भक्तियोग, ज्ञानयोग, हठयोग व तंत्र
  9. हिंदू विद्या व विद्वान- भारतीय विद्या, देवविद्या, श्रुति विद्या और मौखिक विद्या, दर्शन विद्या, समाज शास्त्र, रहस्य।
  10. महिला विषयक- विवाह, तलाक, संपत्ति अधिकार, दहेज सती।
  11. इतिहास और भूगोल, हिंदू, जैन, बौद्ध और सिख साम्राज्य में धार्मिक विकास, जीव-जंतु, पादप जत, नदी और अन्य।

मंगलवार, 6 अगस्त 2013

तेलंगाना विजय के बाद

30 जुलाई की शाम दिल्ली में पहले यूपीए कोआर्डिनेशन कमिटी और फिर कांग्रेस कार्यसमिति ने समवेत स्वर में 'जय तेलंगाना' का उदघोष किया तो हैदराबाद ने विजय का जश्न मनाने में संयम बरता। साल 2009 में तब के गृहमंत्री पी.चिदंबरम् की हवाई घोषणा से आहत हो चुके तेलंगाना राष्ट्र समिति के प्रमुख के. चन्द्रशेखर राव ने कहा कि संसद में पृथक राज्य का प्रस्ताव पारित होने के बाद ही वे जश्न मनायेंगे। जाहिर है दुध से मुंह जला चुके केसीआर इसबार मज्जिगा (तेलुगू में मट्ठा या छाछ को मज्जिगा बोलते हैं) भी फूंक-फूंक कर पी रहे हैं। उन्होंने साफ कर दिया कि इतना होने के बाद ही वे अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय पर विचार करेंगे। कह सकते हैं कि इन दो पंक्तियों में ही टीआरएस प्रमुख ने नये राज्य को लेकर अपनी आशंका और भविष्य की राजनीति का संकेत दे दिया।
केसीआर सहित पृथक तेलंगाना के समर्थन में आंदोलन चला रहे लोगों को कुछ माह पहले से ही आभास हो गया था कॉग्रेस पार्टी अब ज्यादा दिनों तक इस मसले को टाल नहीं सकती है। कांग्रेस नेताओं की बढ़ी सक्रियता से इसके संकेत मिलने लगे थे। पार्टी ने गुलाम नबी आजाद की जगह दिग्विजय सिंह को आंध्रप्रदेश का प्रभारी बनाकर इस दिशा में नया कदम बढ़ाया था। दिग्गी राजा लगातार दौरे कर रहे थे और पार्टीजनों की नब्ज टटोल रहे थे। दिल्ली में आलाकमान ने भी पीसीसी अध्यक्ष बोत्सा सत्यनारायण और राज्य के मुख्यमंत्री के. किरण कुमार रेड्डी सहित आंध्र से आने वाले केन्द्रिय मंत्रियों से कई दौर की बातचीत की। पिछले महीने हैदराबाद के निजाम कॉलेज मैदान में कांग्रेस पार्टी ने एक बड़ी रैली कर अलग तेलंगाना के समर्थन में खुलकर अपनी राय जाहिर की। चिदंबरम् की घोषणा के बाद से ही कांग्रेस पार्टी बुरी तरह उलझ गयी थी। अलग राज्य समर्थक दल और संगठन आम जनता को समझाने में कामयाब हो गये थे कि कांग्रेस विश्वासघाती पार्टी है और नहीं चाहती की तेलंगाना बने। बाद के उपचुनावों में कांग्रेस को भारी पराजय मिली और निर्वाचित प्रतिनिधियों को लगातार जनाक्रोश झेलना पड़ा।कई सांसद और विधायकों ने तो क्षेत्र में जाना हीं छोड़ दिया था। हद तो तब हो गयी जब कांग्रेस के दो सांसदों मंदा जगन्नाथ और जी. विवेकानंद सहित एक पूर्व सांसद के. केशव राव ने टीआरएस का दामन थाम लिया। उधर, रायलसीमा और तटीय आंध्र के इलाके में जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस पार्टी लगातार कांग्रेस को चुनौती दे रही थी। जितने भी चुनाव हुए सबमें वाईएसआरसीपी के प्रत्याशी भारी मतों से विजयी हुए। बची-खुची कसर हाल में हुए पंचायत चुनावों ने निकाल दी। पंचायत चुनावों के नतीजों ने कांग्रेस की मानों लुटिया डुबो दी। यहां तक की सीएम किरण कुमार रेड्डी के गृह जिले चितूर में कांग्रेस तीसरे स्थान पर चली गयी। ऐसे में कांग्रेस के पास स्पष्ट रास्ता चुनने के अलावे कोई विकल्प शेष नहीं था।पहले से ही कांग्रेस के सामने एक तरफ कुंआ और दूसरे तरफ खांई जैसी स्थिति थी। उसे तेलंगाना मुद्दे को लंबे समय तक लटकाये रखने का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है और इस आरोप से आगे भी शायद हीं पिंड़ छुटे।
अब तेलंगाना की घोषणा के बाद भी कांग्रेस की परेशानी कम नहीं हुई है। सीमांध्र के इलाके में आशंका के मुताबिक ही राज्य विभाजन का पुरजोर विरोध शुरू हो गया है। लगातार बंद और हड़ताल जैसे आंदोलन हो रहे हैं। बड़ी संख्या में विधायक, सांसद और राज्य सरकार में शामिल मंत्री पदों से इस्तीफा दे रहे हैं। भारी दबाव झेल रहा कांग्रेस नेतृत्व पृथक राज्य का प्रस्ताव राज्य विधान सभा से पारित कराने की औपचारिकता पूरी करने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहा है। पार्टी के सामने नये राज्य के गठन का प्रस्ताव संसद के शीतकालीन सत्र में पास कराकर मंत्रियों के समूह के पास भेजने जैसी संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करने की जल्दबाजी है। जबकि विपक्षी पार्टियां इसे मॉनसून सत्र में ही पेश करने की मांग कर रही हैं। दूसरी ओर तेलंगाना के विरोधी रहे टीडीपी के मुखिया नारा चन्द्रबाबू नायडु और जगनमोहन रेड्डी को सीमांध्र इलाके में कांग्रेस के खिलाफ फैली लहर का फायदा होते दिख रहा है।
वैसे कांग्रेस को तेलंगाना में आधार वापस मिलने की उम्मीद जगी है। पिछली बार 17 में 12 लोकसभा सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार जीते थे। पार्टी की कोशिश होगी कि इस बार भी कम से कम उतनी सीट हर हाल में लायी जा सके। इसके लिए टीआरएस से हाथ मिलाने की तैयारी हो रही है। तेलंगाना बनाने की घोषणा करते समय कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने इसके संकेत दिये थे। उन्होंने कहा था कि हमने वादा पूरा किया अब केसीआर को अपना वचन पूरा करना है। वैसे भी केसीआर के सामने विकल्प बहुत कम बचे हैं। वे खुद महबूबनगर के बदले अपने गृहक्षेत्र मेदक से लोकसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं, जहां से तेलुगू फिल्मों की मशहूर अदाकार विजयशांति अभी लोकसभा में हैं। केसीआर की इस घोषणा मात्र से विजयशांति ने कांग्रेस में जाने की कोशिशें तेज कर दी है और टीआरएस ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर अलग रास्ता चुनने के लिए स्वतंत्र कर दिया है। चर्चा है कि केसीआर अपनी बेटी के. कविता को महबूबनगर सीट से लड़ाना चाहते हैं, जो तेलंगाना महिला जागृति नामक सांस्कृतिक संस्था की प्रमुख हैं। टीआरएस में केसीआर के बेटे के.तारक रामाराव और भतीजे हरीश राव भी विधायक हैं, जो मौका मिलने पर लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं।
उधर तेलंगाना के आंदोलन में केन्द्रीय भूमिका निभाने वाली टी जेएसी के नेता भी चुनाव में किस्मत आजमाने की हसरत पाले हुए हैं। उनकी मांग है कि संयुक्त कार्रवाई समिति में सक्रिय रहे नेताओं को टीआरएस टिकट दे। केसीआर से उनकी कई दौर की बात हो चुकी है। समिति के संयोजक प्रोफेसर कोदंडरामम ने संकेत दिये हैं कि यदि टीआरएस से बात नहीं बनने की स्थिति में उनका मोर्चा राजनीतिक दल बनाकर चुनाव मैदान में उतरेगा।
केसीआर भी बखूबी जानते हैं कि अकेले दम पर वे 119 सदस्यों वाले तेलंगाना क्षेत्र में सरकार नहीं बना सकते। अभी कांग्रेस के पास 49 एमएलए हैं जबकि बहुमत के लिए जादुई आंकड़ा 60 चाहिए होगा। ऐसे में कांग्रेस के पास सरकार बनाने के लिए 11विधायक कम पड़ेंगे, जिसकी भरपायी एमआईएम के सात और तीन निर्दलीय विधायकों के समर्थन से की जा सकती है। कांग्रेस पार्टी इस इलाके की कमान किसी रेड्डी बिरादरी वाले नेता को सौंप सकती है, क्योंकि आज की तारीख में पार्टी के पास 20 रेड्डी विधायक हैं। वैसे मुख्यमंत्री चुनना भी बहुत आसान रहने वाला नहीं है,क्योंकि कांग्रेस में इस पद के कई दावेदार हैं। यदि सबकुछ सही रहा तो अगले छह माह के भीतर भारत के राजनीतिक मानचित्र पर 29वें राज्य के रुप में तेलंगाना नजर आएगा। और नये तेलंगाना में विधानसभा के वर्तमान गणित को देखते हुए कांग्रेस की सरकार बनेगी जो अगला विधानसभा चुनाव होने तक काम करेगी। आज हर कोई मानने लगा है कि नयी परिस्थितियों में कांग्रेस को लाभ जरुर मिलेगा।भाजपा के लोग भी स्थिति बेहतर होने की उम्मीद पाले हुए हैं। खुद एमआईएम के मुखिया और हैदराबाद के सांसद मो.असदुद्दीन ओवैसी को भी भाजपा के प्रभावी होने का डर सता रहा है।
आज की तारीख में आंध्र के इलाके में कांग्रेस के पास बहुमत के जादुई आंकड़े 88 की तुलना में 97 विधायक हैं। 45 विधायकों के साथ टीडीपी दूसरे नंबर और 17 विधायकों के साथ वाईएसआरसीपी तीसरे स्थान पर है। यानि सीमांध्र में मौका आने पर कांग्रेस को सरकार बनाने में कोई परेशानी नहीं आएगी। ऐसी परिस्थिति में आंध्रप्रदेश के विभाजन के बाद दोनों राज्यों में कांग्रेस के मुख्यमंत्री रहें तो कोई आश्चर्य नहीं होगा।
दरअसल आजादी के बाद 1 अक्टूबर 1953 को भाषाई आधार पर आंध्रप्रदेश भारत का पहला राज्य बना था, जिसकी राजधानी कर्नूल बनायी गयी थी। इसकी पृष्टभूमि तभी तैयार हो गयी थी जब मद्रास में तेलुगु भाषियों के लिए अलग राज्य का निर्माण की मांग को लेकर आमरण अनशन कर रहे कांग्रेसी नेता पोट्टी श्रीरामुलु की मौत हो गयी थी। उस वक्त आंध्र का इलाका मद्रास प्रेसिडेंसी के अधीन था और तेलंगाना का इलाका हैदराबाद रियासत में निजाम के अधीन। यहां के लोग अपनी अलग भाषा, संस्कृति और रीति-रिवाजों के चलते खुद तो अलग मानते थे। जस्टिस फजल अली के नेतृत्व में गठित राज्य पुनर्गठन आयोग ने भी अपनी रिपोर्ट में जनभावना का उल्लेख किया था। उनकी सलाह थी कि हैदराबाद को विशेष दर्जा देकर तेलंगाना को अलग राज्य बना दिया जाए और शेष क्षेत्र को ही आंध्र बनाया जाए। खुद पंडि़त नेहरु भी आंध्र में तेलंगाना के विलय को लेकर सशंकित थे। उन्होंने कहा था कि इस शादी में तलाक की संभावनाएं बनी रहने दी जाए। बावजूद इसके आंध्र की मजबूत कांग्रेसी लॉबी ने राज्य का क्षेत्रफल बड़ा रखने की लालच में तेलंगाना को जबरन वृहत आंध्र योजना में फिट कर दिया। 1 नवंबर 1956 में आंध्रप्रदेश में तेलंगाना को मिला दिया गया और हैदराबाद इसकी नई राजधानी बनी।



तेलंगाना: एक नजर में

* तेलंगाना का आशय है - तेलुगू भाषियों की भूमि
* पहले पूरा इलाका हैदराबाद रियासत का हिस्सा था
* भारतीय सेना ने ऑपरेशन पोलो द्वारा 17 सितंबर,1948 को इसे भारतीय गणराज्य में शामिल किया
* मद्रास स्टेट से अलग हुए इलाके में मिलाकर तेलुगू भाषियों के लिए 1 नवंबर,1956 में आंध्रप्रदेश बना
* तेलंगाना क्षेत्र में 10 जिले हैं - ग्रेटर हैदराबाद, रंगारेड्डी, मेदक, नालगोंडा, महबूबनगर, वारंगल, करीमनगर, निजामाबाद, अदीलाबाद और खम्मम.
* तेलंगाना की भौगोलिक सीमा-रायलसीमा सहित कर्नाटक, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से मिलती है
* क्षेत्रफल 114,840 वर्ग किलोमीटर है
* आबादी 35,286 757 ( जनगणना 2011)
* तेलंगाना की भाषा- तेलुगू,हिन्दी और उर्दू
* अधिकांश इलाका पठारी और सूखाग्रस्त
* प्रमुख नदियां- कृष्णा और गोदावरी
* वर्तमान आंध्रप्रदेश के 294 में से 119 विधायक
*लोकसभा की 42 सीटों में से 17 सीटें
*प्रमुख शहर हैदराबाद, वारंगल, करीमनगर

तेलंगाना का सफरनामा

  • 17 सितम्बर,1948 - भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन पोलो' चलाकर हैदराबाद रियासत के बड़े भू भाग को भारत में मिलाया, तेलंगाना तब उसी रियासत का हिस्सा था
  • 26 जनवरी,1950- केन्द्र सरकार ने एम के वेल्लोदी को हैदराबाद स्टेट का पहला मुख्यमंत्री मनोनीत किया
  • 1952- पहले आम चुनाव के बाद बी. रामाकृष्ण राव पहले निर्वाचित मुख्यमंत्री बने
  • 1 अक्टूबर,1953- मद्रास स्टेट से अलग होकर आंध्र स्टेट देश का पहला भाषाई राज्य बना, कर्नूल में राजधानी बनी
  • 20 फरवरी,1956- तेलंगाना और आंध्र के नेताओं के बीच विलय को लेकर जेंटलमैन एग्रीमेंट साइन
  • 1 नवंबर 1956 - हैदराबाद रियासत से तेलंगाना के तेलुगूभाषियों को आंध्र स्टेट में शामिल कर एक अलग राज्य आंध्र प्रदेश की स्थापना की गई। राजधानी हैदराबाद रखा गया
  • 1969- तेलंगाना को पृथक राज्य बनाने की मांग को लेकर एम.चेन्ना रेड्डी की अगुआई में 'जय तेलंगाना' आंदोलन की शुरुआत, पुलिस की गोलीबारी में 350 से अधिक लोगों की मौत
  • 12 अप्रैल,1969- इंदिरा गांधी ने आठ सूत्री फार्मूला सुझाया, लेकिन तेलंगाना के नेताओं ने प्रस्ताव नामंजूर किया
  • 1972- आंध्र प्रदेश के तटवर्ती इलाकों में 'जय आंध्र' आंदोलन की शुरुआत
  • 1975- तेलंगाना के हितों की रक्षा के लिए छह सूत्री सरकारी परिपत्र जारी
  • 1985- तेलंगाना के सरकारी कर्मियों ने नौकरियों में भेदभाव और अन्याय का मामला उठाया, एनटीआर की सरकार ने राज्यादेश जारी कर तेलंगाना के कर्मचारी हितों की रक्षा की बात कही
  • 1997- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तेलंगाना के समर्थन में आई, 1998 के चुनाव में उसने 'एक मत, दो राज्य' के नारे के साथ चुनाव लड़ा
  • 1999- कांग्रेस पार्टी ने पृथक तेलंगाना बनाने की मांग उठाई
  • 27 अप्रैल,2001- के. चन्द्रशेखर राव ने कैबिनेट मंत्री नहीं बनाये जाने पर टीडीपी छोड़ा और तेलंगाना आंदोल को जारी रखने के लिए तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) बनायी
  • 2001- कांग्रेस पार्टी ने एनडीए सरकार के पास द्वितीय राज्य पुनर्गठन आयोग बनाने की सिफारिश भेजी
  • 2004 - टीआरएस ने कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा, तेलंगाना के पांच लोकसभा और 26 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की। यूपीए ने अपने न्यूनतम साझा कार्यक्रम में तेलंगाना मुद्दे को शामिल किया प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता में तीन सदस्यी समिति का गठन
  • दिसम्बर, 2006- तेलंगाना गठन में विलंभ के विरोध स्वरुप टीआरएस ने केन्द्र और राज्य दोनों सरकारों से गठबंधन तोड़ा
  • अक्टूबर, 2008- टीडीपी ने अपना स्टैंड बदला, अलग राज्य बनाने की मांग का समर्थन
  • 2 सितंबर 2009 -मुख्यमंत्री वाई. एस. राजशेखर रेड्डी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत, राज्य में राजनीतिक अस्थिरता की शुरूआत
  • 29 नवंबर, 2009- टीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव ने पृथक तेलंगाना के लिए आमरण अनशन शुरू किया
  • 9 दिसंबर,2009 - केंद्र सरकार ने तेलंगाना राज्य के गठन प्रक्रिया शुरू करने के लिए कदम उठाने की घोषणा की
  • 23 दिसम्बर,2009- केन्द्र सरकार ने नये राज्य का प्रस्ताव ठंढ़े बस्ते में डाला,विरोध में जोरदार आंदोलन शुरू
  • 3 फरवरी 2010 - केंद्र सरकार ने तेलंगाना मुद्दे पर पांच सदस्यीय श्रीकृष्णा समिति गठित की
  • 30 दिसम्बर,2010-श्रीकृष्ण समिति ने 6 सिफारिशों के साथ अपनी रिपोर्ट सौंप दी
  • 1 जुलाई,2013- कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने तेलंगाना पर निर्णय जल्द होने की बात कही
  • 12 जुलाई 2013- तेलंगाना पर आई रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष के साथ चर्चा के लिए कांग्रेस की कोर कमेटी की बैठक हुई
  • 30 जुलाई 2013- यूपीए समन्वय समिति और कांग्रेस कार्यसमिति ने बैठक में पृथक तेलंगाना राज्य के गठन का निर्णय लिया