बाबा, भगवा और भभूत
हृदय के उद्गार
प्रस्तुतकर्ता Satyajeetprakash पर 2:35 PM
प्रस्तुतकर्ता Satyajeetprakash पर 12:05 PM आध्यात्म , धरोहर , धर्म
सु | प्र | उ | बि | हो | मु | ग | ब | सु | नु | बि | घ | धि | इ | द |
र | रु | फ | सि | सि | रहिं | बस | हि | मं | ल | न | ल | य | न | अं |
सुज | सो | ग | सु | कु | म | स | ग | त | न | इ | ल | धा | बे | नो |
त्य | र | न | कु | जो | म | रि | र | र | अ | की | हो | सं | रा | य |
पु | सु | थ | सी | जे | इ | ग | म | सं | क | रे | हो | स | स | नि |
त | र | त | र | स | हुं | ह | ब | ब | प | चि | स | हिं | स | तु |
म | का | ा | र | र | म | मि | मी | म्हा | ा | जा | हू | हीं | ा | ा |
ता | रा | रे | री | हृ | का | फ | खा | जू | ई | र | रा | पू | द | ल |
नि | को | जो | गो | न | मु | जि | यँ | ने | मनि | क | ज | प | स | ल |
हि | रा | मि | स | री | ग | द | न्मु | ख | म | खि | जि | म | त | जं |
सिं | ख | नु | न | को | मि | निज | र्क | ग | धु | ध | सु | का | स | र |
गु | ब | म | अ | रि | नि | म | ल | ा | न | ढ़ | ती | न | क | भ |
ना | पु | व | अ | ा | र | ल | ा | ए | तु | र | न | नु | वै | थ |
सि | हुं | सु | म्ह | रा | र | स | स | र | त | न | ख | ा | ज | ा |
र | ा | ा | ला | धी | ा | री | ा | हू | हीं | खा | जू | ई | रा | रे |
प्रस्तुतकर्ता Satyajeetprakash पर 1:59 PM जीवन , दर्शन , साहित्य
प्रस्तुतकर्ता Satyajeetprakash पर 1:58 PM विचार , विश्लेषण
एकबार फिर देश के तथाकथित बुद्धिजीवियों की बुद्धि पर सवाल उठ रहे हैं. ऐसा पहलीबार नहीं है कि देश के बुद्धिजीवियों पर सवाल खड़े किए जा रहे हों. देश के तथाकथित बुद्धिजीवियों पर सवाल पहले भी उठते रहे हैं. लेकिन पहले इन सवालों को खारिज कर दिया जाता था. लेकिन इसबार सवाल उठाने वाला मंच ही ऐसा है जिस
जय हिंदी जय भारत
प्रस्तुतकर्ता Satyajeetprakash पर 10:17 PM धरोहर , संस्कृति , साहित्य
सु | प्र | उ | बि | हो | मु | ग | ब | सु | नु | बि | घ | धि | इ | द |
र | रु | फ | सि | सि | रहिं | बस | हि | मं | ल | न | ल | य | न | अं |
सुज | सो | ग | सु | कु | म | स | ग | त | न | इ | ल | धा | बे | नो |
त्य | र | न | कु | जो | म | रि | र | र | अ | की | हो | सं | रा | य |
पु | सु | थ | सी | जे | इ | ग | म | सं | क | रे | हो | स | स | नि |
त | र | त | र | स | हुं | ह | ब | ब | प | चि | स | हिं | स | तु |
म | का | ा | र | र | म | मि | मी | म्हा | ा | जा | हू | हीं | ा | ा |
ता | रा | रे | री | हृ | का | फ | खा | जू | ई | र | रा | पू | द | ल |
नि | को | जो | गो | न | मु | जि | यँ | ने | मनि | क | ज | प | स | ल |
हि | रा | मि | स | री | ग | द | न्मु | ख | म | खि | जि | म | त | जं |
सिं | ख | नु | न | को | मि | निज | र्क | ग | धु | ध | सु | का | स | र |
गु | ब | म | अ | रि | नि | म | ल | ा | न | ढ़ | ती | न | क | भ |
ना | पु | व | अ | ा | र | ल | ा | ए | तु | र | न | नु | वै | थ |
सि | हुं | सु | म्ह | रा | र | स | स | र | त | न | ख | ा | ज | ा |
र | ा | ा | ला | धी | ा | री | ा | हू | हीं | खा | जू | ई | रा | रे |
प्रस्तुतकर्ता Satyajeetprakash पर 10:12 PM राजनीति , विश्लेषण
न्यूज चैनलों पर चल रहे है इंदिरा स्मरण एपिसोड को देखकर आसानी से समझता जा सकता है कि कुछ लोग इस देश को कैसे चला रहा है.![]()
प्रेमचंद ने ठीक ही कहा था कि गवर्नमेंट कुछ पढ़े लिखे लोगों(निहायत ही चालाक) द्वारा गरीबों को दबाने के लिए बनाया गया संगठन है.
टेलीविजन चैनलों पर चला रहे इंदिरा एपिसोड का अर्थ ये बिल्कुल नहीं लगाया जाना चाहिए कि अचानक टेलीविजन चैनलों को इंदिरा प्रेम उत्पन्न हो गया है या वे इंदिरा गांधी के कथित योगदान को याद कर रहे हैं. दरअसल ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है. बल्कि टेलीविजन चैनलों को उनकी हैसियत के हिसाब से पैसे दिए गए, उसी के अनुसार उसे वीडियो फुटेज मुहैया कराए गए और कांग्रेसी भक्तों द्वारा प्रत्येक एपीसोड की पटकथा तैयार की गई-
चैनलों पर चल रहे कुछ कार्यक्रमों की बानगी-
इंदिरा बिन इंडिया-
कतरा-कतरा हिंदुस्तान.. आदि
इंदिरा स्मरण एपिसोड में जनता के टैक्स के पैसे पानी की तरह बहाए जा रहे हैं. चैनलों को लाखों-करोड़ों रुपये दिए जा रहे हैं. चुनाव प्रसार के तर्ज पर.
ये सब ऐसे समय में हो रहा है, जबकि पूरे देश के लोग उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती द्वारा उत्तरप्रदेश में बनाए जा रहे स्मारकों पर सवालिया निशान खड़े रहे हैं. मायावती पर जनता के पैसे के दुरुपयोग का आरोप लग रहा है. आखिर, कोई केंद्र सरकार से पूरे कि इंदिरा संस्मरण एपिसोड पर खर्च किए जा रहे ये पैसे क्या जनता के नहीं हैं और क्या इनका सदुपयोग हो रहा है.
जनता को इमोशनली(भावनात्मक रूप से) ब्लैकमेल करने का हथकंडा अगर कांग्रेस अपना सकती है तो मायावती क्यों नहीं. आखिर इंदिरा गांधी ने सत्तर के दशक में देश के गरीबी हटा दी थी. फिर आज राहुल बाबा क्यों चिल्ला रहे हैं कि ये गरीबों का देश है. आखिर क्यों(राहुल के ही शब्दों में) सरकारी पैसा जनता तक नहीं पहुंचती है. आखिर किसने भ्रष्टाचार को बढ़ाया. आखिर किसने भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दिया. राहुल बाबा ने आखिर क्वात्रोकी ड्रामें में वे विद्रूप क्यों बने रहे.
प्रस्तुतकर्ता Satyajeetprakash पर 10:56 PM तकनीक , पीडीएफ
पीडीएफ पुस्तक प्रकाशन पर मेरी पोस्ट पर कुछ प्रतिक्रियाएं मिली. पीएन सुब्रह्मण्यन जी ने कहा कि इस विषय पर थोड़ा और विस्तार से बताया जाए. उन्हीं को समर्पित है मेरी ये पोस्ट-
दरअसल, हमारा हिंदी ब्लॉग जगत समृद्ध होता जा रहा है. कुराफातों हो या व्यक्तिगत टिप्पणियां. ये सब मिलकर हिंदी ब्लॉग जगत को समृद्ध कर रहा है. सैंकड़ों ऐसे ब्लॉग हैं जिनपर स्तरीय हीं नहीं, उच्चस्तरीय लेख मौजूद हैं. शब्दावली को ही लीजिए, यहां मौजूद पोस्ट हिंदी भाषा विज्ञान की धरोहर हैं. मैंने नॉर्मन लेविस की वर्ड पावर मेड ईजी पढ़ी थी. उन्होंने अंग्रेजी भाषा के शब्दों को याद रखना और समझना आसान बना दिया था. ऐसा ही कार्य अजीत वडनेरकर जी कर रहे हैं. इससे हिंदी भाषा को बहुत फायदा मिलेगा. उनकी रचना ब्लॉग पोस्ट को रूप में है. अगर उस ब्लॉग के सभी पोस्ट को एक जगह समेट कर पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया जाता है तो उससे लाखों लोग लाभान्वित होंगे.
इसी तरह आपके ब्लॉग का विषय जो हो, आप उसे इकट्ठा कर पीडीएफ पुस्तक के रूप में प्रकाशित कर सकते हैं.
उदाहरण के लिए मैंने विकीपीडिया पर निर्वाचित लेखों को ओपेन ऑफिस में ज्यों का त्यों चिपका दिया. फिर इसे सेव एज पीडीएफ फाइल के रूप में सेव कर लिया. और पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया.
देखिए, विकीपीडिया के चौदह निर्वाचित लेखों की ये पुस्तक-
कई कारणों से किताब हटा दिया गया है.
अब आप भी अपने ब्लॉग पोस्ट को ओपेन ऑफिस में चिपकाइये और फिर पीडीएफ बनाकर प्रकाशित करिए.
प्रस्तुतकर्ता Satyajeetprakash पर 7:34 AM तकनीक , पीडीएफ
1. सबसे पहले इम्बेडइट साइट पर जाकरपीडीएफ किताब अपलोड करें, लॉग इन करने की जरूरत नहीं है.
(नोट- अपनी पीडीएफ किताब बनाने के लिए, अपनी विषय-वस्तु ओपन ओफिस में चिपकाएं और एक्सपोर्ट एज पीडीएफ फाइल के रूप में सेव कर लें. इम्बेडइट में सीधे आपके कंप्यूटर से पीडीएफ फाइल अपलोड की जा सकती है.)
2. फाइड अपलोड करने के बाद पूछेगा आप गूगल, ट्विटर आदि में से कहां साइन-इन करना चाहते हैं तो आप गूगल चुन लीजिए, हां दूसरा भी चुन सकते हैं.
3. लॉग इन करते ही आपको इम्बेड कोड मिलेगा. उसे आप अपने ब्लॉग के न्यू पोस्ट में जाकर एचटीएमएल में चिपका दीजिए.
3. हां सेव करते वक्त थोड़ी आपत्ति दिखाएगा, उसे स्टॉप शोइंग इरर बॉक्स में क्लिक करे समस्या को दूर सकते हैं. बस चंद सैकेंडों में आपकी किताब प्रकाशित हो गई.
यहां प्रस्तुत है शेखर एक जीवनी का पहला भाग
कई कारणों से किताब हटा दिया गया है.
प्रस्तुतकर्ता Satyajeetprakash पर 10:49 PM पसंदीदा गीत
हर इक जिस्म घायल
हर इक रूह प्यासी
निगाहों में उलझन
दिलों में उदासी
ये दुनिया है या
आलमे बद-हवासी
ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है..
फिल्म- प्यारा का ये गाना प्रस्तुत है आपकी सेवा में-
जय हिंदी जय भारत
प्रस्तुतकर्ता Satyajeetprakash पर 7:46 AM पसंदीदा गीत
बीआर चोपड़ा की सामाजिक उद्देश्यपरक फिल्म निकाह का गीत बीते हुए लम्हों की कसक साथ तो होगी सुनिए-
जय हिंदी जय भारत
Designed by Free WordPress Themes | Converted into Blogger Templates by Theme Craft | Falcon Hive